जीवनसाथी

स्वाद के रस्ते से होकर बस दिल में उतर जाती हो तुम
इस घर को संवारा तुमने चारों कोने महकाती तुम
छोटे से संसार को बोलो कैसे बांधकर रखती हो
जैसे माला में हों मोती तुम हमें पिरोकर रखती हो
परिवार सुरक्षित रखती हो क्या हो एलआईसी पॉलिसी
जो जीवन के साथ भी है और जीवन के बाद भी

मैं तर्क बघारा हूँ करता तुम सोच में कायम रहती हो
मेरी नाराजी को अक्सर कितनी शांति से सहती हो
कभी नहीं जताती हो पर अक्सर ठीक ही कहती हो
मेरी ही नज़रों में कभी शर्मिंदा नहीं होने देती हो
परिवार सुरक्षित रखती हो क्या हो एलआईसी पॉलिसी
जो जीवन के साथ भी है और जीवन के बाद भी

जी करता है तारीफ़ करूँ पर अहम् उलहाने देता है
खोखला दंभ पौरुष का है नहीं क्षमा मांगने देता है
फिर भी समझ सको तो मुझको माफ़ी दे देना
दिल की मेरी बातों को तुम बिना कहे समझ लेना
परिवार तुम्हारे हाथों में तुम एलआईसी पॉलिसी
जो जीवन के साथ भी है और जीवन के बाद भी

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