उलटा पहिया

आंसू बहे और न काँधे मिले
मुसाफिर सफर पर चल भी दिए
चीख-ओ-पुकार बस शोर हाहाकार
वक्त के उलटे पहिये में लाखों पिसे
वीरान बस्तियां बुजुर्ग मदहोश थे
देखती रहीं सहमी नस्लें आंसू पिए
बवंडर थमेगा तो मालूम होगा
पेड़ कितने और घर कितने उजड़े
मंज़र ज़माना यह भूलेगा नहीं
देना होगा हिसाब इंतज़ार कीजिये

2 thoughts on “उलटा पहिया”

Leave a Reply to AvneetMishra#Dilkiawaaz Cancel reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s