राज-नीति-शास्त्र(शस्त्र)

‘राज’ और ‘शास्त्र’ दो दोस्त हैं
‘नीति’ ‘राज़’ की सौतेली बहन है
‘शिक्षा’ ‘शास्त्र’ की पड़ोसन है
और ‘नीति’ की बाल सखी है

एक दिन सावधानी हटी और
‘शास्त्र’ के साथ दुर्घटना घटी
वह पूरी तरह ठीक तो हो गया
मगर उसका एक हाथ कट गया
अब वह केवल ‘शस्त्र’ रह गया था
और ‘राज’ का सेवक हो गया था

और दो पात्र हैं, एक है ‘सभ्य’
जो दुसरे पात्र ‘समाज’ का
का इकलौता लाडला बेटा है
‘समाज’ एक बूढ़ा’ किसान है
और ‘सभ्य’ गबरू जवान है

‘राज’ ‘नीति’ को बहन नहीं मानता
‘शिक्षा’ ‘राज’ को चाहती है  मगर
‘शस्त्र’ के कारण  डरती है औरअब तो
‘नीति’ से भी उसकी अनबन हो गयी है

‘नीति’ को ‘शस्त्र’ से तो बैर है
पर ‘सभ्य’ को पसंद करती है
यह बात ”राज’ को मालूम हुई
तो उसने ‘शस्त्र’ से मिलकर
‘सभ्य’ को कई बार पीटा है

‘राज’ सदा से ताकतवर रहा है
क्योंकि ‘शस्त्र’ उसके साथ है
‘शस्त्र’ के बल पर अक्सर ‘राज’
‘शिक्षा’ का शोषण करता रहा है
‘नीति’ सब जानती है मगर चुप है

अपना ‘सभ्य’ शिक्षा का दीवाना है
पर ‘राज की ताकत से डरता है
‘नीति’ सब जानती है और इसीलिए
‘शिक्षा’ से उसकी अनबन रहती है

फिर एक दिन आया जब कहानी में
मोड़ आया और मैं गड्डी छोड़ आया

‘सभ्य’ और ‘शिक्षा’ की चाहत का राज
‘राज के लिए अब और राज नहीं रहा
उसे जब पता चला तो नाराज़ हो गया
उसने ताकत के बल पर ‘शस्त्र’ द्वारा
‘सभ्य’ को जान से मरवा दिया

तब से राज और ताकत का मेल है
‘शस्त्र’ उन दोनों का आज भी दास है
‘नीति’ ‘सभ्य’ की मौत से सदमे में है
बीमार है और दवाईयों पर ज़िंदा है

लाचार ‘समाज’ ‘सभ्य’ का शव
काँधे पर उठाये ताकतवर ‘राज़’ से
मदद के लिए गुहार लगा रहा है और
‘राज’ ताकत और ‘शस्त्र’ के बल पर
हर रोज़ ‘शिक्षा’ का शोषण कर रहा है

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