अशआर मेरे

अशआर लोग  मेरे पढ़ने लगे हैं
दिल की आवाज़ से जुड़ने लगे हैं
व्हाट्सऍप फेसबुक और यूट्यूब पर
दिन रात सब फॉलो करने लगे हैं

कोई पढता नखरे से कोई चाहत से
जो भी पढ़े देते उसको ये राहत हैं
आलम ये है की हद से भी ज्यादा
बेक़रार  इनके लिए रहने लगे हैं

अशआर  लोग  मेरे पढ़ने लगे  हैं
दिल की आवाज़ से जुड़ने लगे हैं

गैर भी पढ़ते हैं पढ़ते हैं अपने भी
हकीकत है इनमें और बसते सपने भी
दोस्त तो दोस्त हैं दुश्मन भी अब तो
दिल के घाव इनसे भरने लगे हैं

अशआर लोग अब मेरे पढ़ने लगे हैं
दिल की आवाज़ से जुड़ने लगे हैं

सपने दिखाते हैं दिल को लुभाते हैं
अलफ़ाज़ मेरे सब को रिझाते हैं
हर कोई इनका है ये प्यारे सब के
रफ्ता रफ्ता रूह में उतरने लगे हैं

अशआर लोग अब मेरे पढ़ने लगे हैं
दिल की आवाज़ से जुड़ने लगे हैं

One thought on “अशआर मेरे”

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