सर-ए-महफ़िल

तेरी   महफ़िल   में   आकर  देख लिया
मेहमां   सिर्फ   मैं ही   नहीं,  देख लिया
तेरी   महफ़िल   में   आकर  देख लिया

जुबां   तो   पूछती   है हाल-ए-दिल मेरा
गर्मजोशी   में   नहीं वो बात, देख लिया
तेरी   महफ़िल   में   आकर  देख लिया

जिन  आँखों  को मेरा इंतज़ार रहता था
गैरों   को  करती रही तलाश,देख लिया
तेरी   महफ़िल   में   आकर  देख लिया

मुस्कुरा कर मिले सर-ए-महफ़िल जनाब
मेरे   सवालों पर  आये सवाल, देख लिया
तेरी   महफ़िल   में   आकर   देख  लिया

तेरे वादे पे कि न बदलेंगे दिल क़यामत तक
ख्वाम   खां   कर  लिया ऐतबार, देख लिया
तेरी   महफ़िल   में    आकर    देख   लिया

खामोशियाँ कहतीं हैं आमद है क़यामत की
बेरुखी ब  न   जाती  है  कातिल, देख लिया
तेरी   महफ़िल   में   आकर    देख    लिया

भूले   तुम   हो   तो   क्या   रहेंगे  हम हम ही
ज़माना  कहेगा   वादे    का  चलन देख लिया
तेरी      महफ़िल   में   आकर   देख    लिया

मेहमां   सिर्फ   मैं   ही    नहीं,   देख   लिया
तेरी      महफ़िल   में   आकर   देख   लिया

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