उदगार

मन में कुछ सवाल उठते हैं मन की बात कहूं किसको
मन की बात वो करते हैं बाक़ी है इसका हक़ किसको

कैसे कहूं दिल डरता है बुरा न कहीं लग जाए उनको
मेरी राष्ट्र प्रेम परिभाषा देश द्रोह न लग जाए उनको
उनकी सोच बस देश प्रेम उनका विरोध छजा किसको

मेरा भारत उसका भारत सबका अपना अपना भारत
व्याख्याओं में सबकी बटकर रह गया गया मेरा भारत
संताने जब दर्द दे रहीं माता ज़ख्म दिखाए किसको

हो गई मलिन समाज की भाषा बिगड़ी धर्म की परिभाषा
चापलूस अखबार मीडिया परोस रहे भड़काऊ भाषा
राजनीति बाबा को भा गयी धर्म की लाठी दें किसको

अपनी अपनी सभी हांकते सुनने की आदत छूटी
आंदोलन के नाम पर देखो फूंकते अपनी संपत्ति
दुश्मन छुपे हुए घर में हैं टोपी दोष की दें किस को

भीतर भीतर रो ले मनुआ आह रुलाई की न निकले
अपने ज्ञान को भूल जा पगले परिभाषा उनकी रट ले
तेरे कारण लटक गया तो मैं फ़रियाद करूँ किसको

मन में कुछ उदगार उठे हैं मन की बात कहूं किसको
मन की बात ‘वे’ करते हैं बाक़ी इसका हक़ है किसको

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